टाइटैनिक जहाज के बारे में रोचक जानकारी

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टाइटैनिक जहाज उस दौर का सबसे बड़ा जहाज था जो इंसानों द्वारा बनायीं गई उस समय की सबसे बड़ी चीज थी।

जहाज 14-15 अप्रैल 1912 की रात को 2:20 Am पर डूबा था।

हिमखंड से टक्कर के बाद टाइटैनिक को डूबने में 2 घंटे 40 मिनट लगे थे।



यदि इस जहाज को 30 सेकंड पहले मोड़ लिया जाता तो इसे बर्फ के पर्वत से टकराने से बचाया जा सकता था।

इसका निर्माण कार्य 31 मार्च 1909 को शुरू किया गया था जिस पर 3000 लोगो ने काम किया और इस जहाज को 31 मई 1911 को 26 महीन में तैयार किया गया था।

लॉन्चिंग के दिन इस विशाल टाइटैनिक को देखने के लिए 1 लाख से भी ज्यादा लोग आये थे।

इसकी लम्बाई 291.5 मीटर थी जिसमे 3 फुटबॉल मैदान आसानी से आ सकते थे।

इस जहाज को बनाने में $7.5 मिलियन लगे थे। जिसकी कीमत 1997 तक $120 मिलियन के समान थी।

जबकि टाइटैनिक फिल्म को बनाने में $200 मिलियन का खर्चा आया था और इस फिल्म में दुनिया भर में $2 बिलियन की कमाई की तथा 11 ऑस्कर भी जीते।

इस जहाज को चलाने के लिए प्रतिदिन 825 टन कोयले की जरुरत होती थी।

टाइटैनिक में हर रोज 14,000 गैलन पीने का पानी, 40,000 अंडे, 1500 गैलन दूध, 8000 सिगार स्तेमाल होते थे।

टाइटैनिक जहाज की चार चिमिनियाँ थी जिसमे से तीन चिमनियाँ सिर्फ धुआं निकालने के लिए लगायी गयी थी। और एक जहाज का संतुलन और इसके showpiece के लिए लगाई गयी थी, हर एक चिमनी इतनी चौड़ी थी की इनमे से दो ट्रेन एक साथ आसानी से निकल सकती थी।

Titanic Ship के अन्दर Gym, Library, swimming pool Garden, restaurant जैसी सारी सुविधाए उपलब्ध थी।

इसमें से 13 जोड़े ऐसे थे जो हनीमून मनाने के लिए जा रहे थे।

जहाज में लगी सीटी को 16 kilometer दूर तक भी सुना जा सकता था।

Titanic में 860 crew member थे जिनमे 23 महिलाये भी थी।

बर्फ के पर्वत से टकराने से पहले जहाज को 6 चेतावनी मिली थी।

उस वक़्त कुछ लोग ऐसे भी थे जिनको टाइटैनिक में सफ़र नहीं करना था। लेकिन कोयले की कमी के कारण बाकि जहाज रद्द हो गए और उन जहाजो के यात्रियों को भी टाइटैनिक जहाज में ही शिफ्ट कर दिया गया था।



टाइटैनिक में
· First Class -> $4350 यानी 2 लाख 76 हज़ार रुपये।
· Second Class -> $1750 यानी 1 लाख 11 हज़ार रुपये।
· Third Class -> $30 यानी 2 हज़ार रुपये।

की Ticket होती थी अगर हम आज के जमाने की बात करे तो आज किसी आदमी को titanic जहाज के फर्स्ट क्लास में सफ़र करने के लिए 50 लाख रुपये देने पड़ते।

यह जहाज 10 अप्रैल 1912 को इंग्लैंड के Southampton से new york शहर के लिए रवाना हुआ था। और दुर्भाग्यवश यह इसकी पहली और आखिरी यात्रा बनी।

जब Titanic जहाज डूब गया बीच समंदर में

14-15 अप्रैल 1912 की रात को दुनिया का सबसे बड़ा जहाज टाइटैनिक एक बर्फ के पर्वत से टकराकर दो टुकडो मे टूटा। और आधी रात को समा गया उत्तरी अटलांटिक महासागर में।

14 अप्रैल की रात को 11:40Pm को टाइटैनिक बर्फ के एक विशाल हिमखंड से टकराया । जिस से इसके अगले हिस्से में छेद हो गया और जहाज के अन्दर पानी भरने लगा, 15 अप्रैल की रात 2:20Am पर इस जहाज के दो दुकड़े हुए और यह समुद्र में समा गया। जिसमें 1517 लोगो की मौत हुई और 706 लोगो को बचाया गया।

जहाज को डूबने में 2 घंटे 40 मिनट का वक़्त लगा।

इसमें 20 lifeboats थी मगर 2 घंटे 40 मिनट में केवल 16 lifeboats को ही पानी में उतारा गया और इनमे भी इनकी क्षमता से कम पैसेंजर थे जिसकी वजह से काफी सीटे खाली भी रह गयी वरना और लोग की जान भी बचायी जा सकती थी । और सबसे पहली वाली लाइफबोट में तो केवल 28 यात्री ही बैठे क्योंकि बाकियों को लगा कि जहाज नहीं डूबेगा।

जब टाइटैनिक जहाज डूबा तब वहाँ के पानी का तापमान -2 degree था। जिसमे कोई भी इंसान 20 मिनट से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकता था, मगर जहाज के मुख्य बेकर ने बहत ज्यादा शराब पी ली थी जिसकी वजह से वे आधे घंटे तक भी जिंदा रह पाए। और फिर उनको लास्ट में आखिरी lifeboat से बचाया भी गया।

सबसे पहले महिलाओ और बच्चो को बचाया जा रहा था टाइटैनिक जहाज से बचने वाले 706 लोगो में केवल 58 पुरुष थे।

Titanic के आखिरी समय तक डूबने तक भी संगीतकार अपना संगीत बजा रहे थे।

Titanic Ship में डूबने वाले 1517 लोगो में से केवल 333 लोगो के शव ही बरामद हो पाए।

इस जहाज के मलवे को खोजने के 73 साल का वक़्त लग गया था। 1 सितम्बर 1985 को इसका मलबा ढूंडा गया था।

इसको ढूंडने पर पता चला की समुद्र में जहाज के दो टुकड़े हुए पड़े हैं। और इन दोनों टुकडो के बीच की दूरी 650 meter है।

ये तस्वीर समुद्र के अन्दर की हैं जो टाइटैनिक को खोजने वाले गोताखोरों ने ली हैं।

Titanic जहाज पर 12 कुत्ते थे जिनमे से 3 को बचाया गया था।

इस जहाज के architect भी डूबकर मरने वालो में शामिल थे।

जापान का एक व्यक्ति इस दुर्घटना में जीवित बच गया था। और जब वह जापान गया तो जापान के लोग उसको इसलिए कायर कहने लगे क्योंकि वह बाकी लोग के साथ मरा नहीं।

सारे crew member अपनी आखिरी सांस तक यात्रियों को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे।

जहाज के एक बचे हुए crew member ने यह बात कही की जहाज के एक locker में दूरबीन भी रखा हुआ था। जिसकी चाबी किस के पास नहीं थी। यदि होती तो शायद जहाज उस iceberg से नहीं टकराता और यह दुर्घटना नहीं होती।

इस जहाज के captain smith इस यात्रा के बाद retirement लेने की तैयार में थे। मगर दुर्भाग्यवश यह सफ़र उनका आखिरी सफ़र बना गया

जब Titanic डूबा, तब वह अपने सफर के चौथे दिन पर था। जमीन से करीब 600 Kilometer दूर।

जिस हिमपर्वत से जहाज टकराया था। उसकी ऊंचाई करीब 100 फीट थी। यह Greenland के ग्लेशियर से आया था।

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